आंसुओं से AIR 1 तक का सफर: नीट यूजी में पंजाब के आर्यन गुप्ता ने रचा इतिहास, 715 अंकों के साथ बने देश के चमकते सितारे
लुधियाना, 18 जुलाई :
नीट यूजी 2026 के परिणाम घोषित होते ही पूरे देश में पंजाब के आर्यन गुप्ता का नाम गूंज उठा है। आर्यन ने परीक्षा में 99.9999 परसेंटाइल के अभूतपूर्व स्कोर और 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 पर अपना कब्जा जमाया है। हालांकि, आर्यन की यह ऐतिहासिक सफलता केवल एक टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि यह कहानी उस कठिन संघर्ष और अटूट संकल्प की है जिसने निराशा को भी इतिहास रचने के अवसर में बदल दिया।
जब परीक्षा रद्द होने पर टूट गए थे आर्यन
एक विशेष वीडियो में अपनी आपबीती साझा करते हुए आर्यन ने बताया कि उन्होंने 3 मई को होने वाले पहले नीट पेपर के लिए दिन-रात एक करके तैयारी की थी। लेकिन जब परीक्षा रद्द होने की खबर आई, तो वह पूरी तरह टूट गए और खूब रोए थे। आर्यन के मुताबिक, उस झटके ने उन्हें गहरा दर्द दिया, लेकिन वह ज्यादा समय तक निराश नहीं रहे। उन्होंने खुद को संभाला और महज एक सप्ताह के भीतर अपनी मानसिक स्थिति को मजबूत कर अगले ही दिन से फिर किताबों की दुनिया में लौट आए। उन्होंने कहा कि वे इतनी आसानी से हार मानने वाले नहीं थे।
भाई आदित्य बने मुश्किल वक्त में सबसे बड़ी हिम्मत
इस कठिन दौर में आर्यन को डिप्रेशन से बाहर निकालने और उनका हौसला बढ़ाने में उनके भाई आदित्य का सबसे बड़ा हाथ रहा। आदित्य, जो खुद वर्तमान में मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) कर रहे हैं, ने हमेशा आर्यन का साथ दिया। आर्यन ने उन मुश्किल दिनों में आदित्य को अपनी हिम्मत का साथी बताया। आदित्य ने ही आर्यन को प्रेरित किया कि वे इस री-टेस्ट को किसी सजा के रूप में न देखें, बल्कि इसे और भी बेहतर प्रदर्शन करने तथा अपनी तैयारी को धार देने के एक दूसरे मौके के तौर पर स्वीकार करें। भाई की इसी प्रेरणा ने आर्यन का पूरा नजरिया बदल दिया।
16-17 घंटे की कड़ी तपस्या और अधूरी नींद
इस अविश्वसनीय मुकाम को हासिल करने के पीछे आर्यन की कड़ी तपस्या रही है। जब यह खबर उनके परिवार को मिली, तो सबने उनकी इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाया। आर्यन ने बताया कि उन्होंने प्रतिदिन 16 से 17 घंटे तक लगातार कड़ी मेहनत की। कई बार ऐसा भी हुआ कि लक्ष्य को पाने के जुनून में वे बिना थके लगातार पढ़ते रहे और इसी पक्के इरादे के कारण उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आती थी।
दादी को खोने के बाद लिया डॉक्टर बनने का फैसला
एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखने वाले आर्यन, जहां माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और भाई भी एमबीबीएस कर रहे हैं, के लिए यह पल पूरी तरह भावुक करने वाला है। उन्होंने अपने करियर के इस खास चुनाव के पीछे की एक मुख्य वजह साझा की। आर्यन ने बताया कि जब वे तीसरी कक्षा में थे, तब उन्होंने अपनी दादी को कैंसर के कारण खो दिया था। दादी की कैंसर से उस जंग और उनके जाने के दुख ने आर्यन के दिल पर गहरा असर डाला। इसी घटना ने उन्हें दूसरों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने और चिकित्सा के क्षेत्र को चुनने के लिए प्रेरित किया। आर्यन भविष्य में एक ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बनना चाहते हैं और कैंसर के इलाज के क्षेत्र में विशेष काम करना चाहते हैं।
“यह तो बस शुरुआत है, आगे लंबा सफर बाकी”
नीट यूजी में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद भी आर्यन का मानना है कि यह सफलता तो केवल उनके सपने की शुरुआत है और अभी एक लंबा सफर तय करना बाकी है। इस सफर में अब एक सही और सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कॉलेज का चयन करना और चिकित्सा की बारीकियों को लगातार सीखते रहना शामिल है।
नीट अभ्यर्थियों के लिए आर्यन का सफलता मंत्र
भविष्य में नीट परीक्षा की तैयारी करने वाले देश के लाखों छात्रों को सलाह देते हुए आर्यन गुप्ता ने कहा कि सबसे पहले अपने शिक्षकों पर अटूट भरोसा रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि उनके पास सालों का अनुभव और सही मार्गदर्शन होता है। उन्होंने सफलता का मूलमंत्र देते हुए कहा कि यदि कोई भी छात्र पूरी ईमानदारी, लगन और निरंतरता (Consistency) के साथ मेहनत करता है, तो उसे सफलता मिलना निश्चित है।