लुधियाना : कांग्रेस ने आज लुधियाना नगर निगम के बजट की कड़ी आलोचना करते हुए आवंटन, खर्च और प्रक्रियाओं में गंभीर गड़बड़ियों पर चिंता जताई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बजट को पूरा कोरम न होने के बावजूद पास किया गया।
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्रीमती ममता आशू ने कहा कि अधूरे कोरम के बावजूद बजट पारित किया जाना कार्यवाही की वैधता और नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने बुद्धा दरिया की डी-सिल्टिंग (सफाई) के लिए रखी गई राशि पर भी सवाल उठाए, जो एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और शहरी परियोजना है। उन्होंने कहा कि जहां निगम ने मौजूदा बजट में 300 लाख रुपये का प्रावधान रखा है, वहीं वास्तविक खर्च काफी कम है—संशोधित अनुमान केवल 28.49 लाख रुपये हैं और एक अन्य कॉलम में मात्र 2.51 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के लिए फिर से 31 लाख से बढ़ाकर 300 लाख रुपये तक का बड़ा उछाल दिखाया गया है, जो यह दर्शाता है कि ऊंचे अनुमान लगाए जाते हैं लेकिन काम उस स्तर पर नहीं होता।
इसी तरह “मशीनरी खरीद” के मद में भी वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले आंकड़े 62.98 लाख रुपये और बजट आवंटन 150 लाख रुपये के मुकाबले वास्तविक खर्च 256.65 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
अन्य आंकड़ों के अनुसार 23.35 लाख रुपये की राशि एक अन्य श्रेणी में दर्शाई गई है, जबकि भविष्य के अनुमान 280 लाख से 300 लाख रुपये तक बढ़ते दिख रहे हैं, जो अधिक खर्च और कमजोर वित्तीय नियंत्रण की ओर इशारा करता है।
ममता आशू ने कहा कि ये आंकड़े मिलकर यह दर्शाते हैं कि या तो परियोजनाओं में भारी देरी हो रही है या फिर बजट में बड़े अनुमान लगाए जाते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने की क्षमता नहीं है।
उन्होंने कहा कि बुद्धा दरिया जैसे जरूरी कार्यों में कम खर्च प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है और साथ ही पर्यावरण सुधार के प्रयासों में देरी करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी ओर स्वीकृत सीमाओं से अधिक मशीनरी पर खर्च वित्तीय नियमों और मंजूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहे हैं, खासकर प्रक्रियाओं के पालन और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने स्थानीय निकाय मंत्री से अपील की कि मामले का गंभीर संज्ञान लिया जाए, गड़बड़ियों की जांच कराई जाए और उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि बजट निर्माण और क्रियान्वयन में अधिक पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बजट के वादों और जमीनी हकीकत के बीच यह अंतर जारी रहा तो लोगों का स्थानीय प्रशासन पर भरोसा कम हो सकता है।