
लुधियाना, 10 मार्च (दिनेश मौदगिल):
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही 2026 में मौसम के तापमान के साथ-साथ राज्य की राजनीतिक गर्मी भी बढ़ती जाएगी। पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपना जोर लगाना शुरू कर दिया है और अपनी कमर कसते हुए मैदान में डट चुकी हैं। किस पार्टी की सरकार बनेगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन आगामी महीने पंजाब की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। अब समय राजनीतिक उठापटक का रहेगा, जहाँ कई बड़े नेता एक पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी में शामिल होते दिखाई देंगे।
पंजाब में इस समय आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल बादल और बीजेपी मुख्य पार्टियां हैं। वहीं, एक नई बनी अकाली दल पार्टी भी इन चुनावों में अहम रोल निभा सकती है। इस साल राजनीति की रंगत अपने चरम पर देखने को मिलेगी।
कुंवर विजय प्रताप और नवजोत सिद्धू पर टिकी निगाहें
अपनी कार्यशैली के लिए मशहूर पूर्व आईपीएस और अमृतसर से विधायक डॉ कुंवर विजय प्रताप सिंह पर जनता और अन्य पार्टियों की विशेष निगाहें रहेंगी। वह पंजाब की राजनीति का एक बड़ा चेहरा बन चुके हैं और उनका अगला फैसला राज्य की सियासी बिसात तय करेगा। दूसरी ओर, कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू जो अभी राजनीति से दूर चल रहे हैं, उनके बारे में भी चर्चा गर्म है कि क्या वह दोबारा चुनावी पिच पर बैटिंग करेंगे और क्या वह कांग्रेस की तरफ से ही दंगल में कूदेंगे या किसी अन्य पार्टी का दामन थामेंगे।
सत्ता में वापसी के लिए ‘आप’ झोंकेगी ताकत
राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी दोबारा सरकार बनाने के लिए पूरा प्रयास करेगी। हालांकि, उनके लिए राह आसान नहीं होगी क्योंकि पिछली बार की लहर ने कई दिग्गज नेताओं को हरा दिया था। अब जनता तय करेगी कि वह पार्टी के कामकाज से कितनी संतुष्ट है।
कांग्रेस को खत्म करनी होगी गुटबाजी
2022 के चुनावों से पहले कांग्रेस सबसे ताकतवर थी, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद शुरू हुई अंतर्कलह और गुटबाजी ने पार्टी को कमजोर कर दिया है। 2026 में कांग्रेस में बड़े बदलाव की संभावना है। यदि हाई कमान गुटबाजी खत्म कर पार्टी को एकजुट कर लेती है, तो मुकाबला काफी दिलचस्प हो जाएगा।
बीजेपी और अकाली दल की नई रणनीति
पंजाब में बीजेपी इस बार अकेले दम पर सरकार बनाने के लिए अपनी गोटियां फिट कर रही है। पार्टी में कई नए चेहरे शामिल होने की संभावना है और वे किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए विशेष प्रयत्न कर सकते हैं। वहीं, अकाली दल के सुप्रीमो सुखबीर सिंह बादल 10 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए रूठों को मनाने और पार्टी को मजबूत करने में पूरा जोर लगाएंगे।
धरने-प्रदर्शन और दल-बदलुओं का सीजन
यह साल सियासी गर्माहट वाला होगा, जिसमें विपक्षी पार्टियां सरकार के खिलाफ धरने-प्रदर्शनों में वृद्धि करेंगी। सियासी मीटिंगों और समागमों का दौर बढ़ेगा और पार्टियां एक-दूसरे पर आरोपों की झड़ी लगाएंगी। सबसे खास बात यह कि इस साल ‘दल-बदलुओं’ का सीजन रहेगा, जहाँ नेता अपनी सुविधा के अनुसार कई बार पार्टियां बदलते नजर आएंगे।